तुम्हारे लिए

प्यारी लड़की, 

ये खत बहुत पहले लिखा जा चुका था। लेकिन नुमाया आज हो रहा है। इसलिए क्योंकि मैं सोच रहा था कि कैसे तुम्हें ये बताया जाए तुम आज भी वैसी ही हो। तुम उलझनों को आंखों में लिए ठीक वैसे ही उनको ठीक करने की नाकाम कोशिशों में उलझी हो जैसे तुम्हारे बालों की लट उलझ जाए तो सुलझाने लगती हो। पर दोनों में फर्क है।

तुम उलझनों का हल ढूंढ रही हो, जबकि वो एक सतत प्रक्रिया है। बालों की लट कभी ये सोचकर नहीं सुलझाई होगी कि ये हमेशा के लिए ठीक हो जाएं, कभी न उलझें। नहीं ना ? क्योंकि पता है। बालों का गुण है उलझना और तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा है उनको सुलझाना। जैसे बाल आखिरी बार कभी नहीं सुलझते वैसे ही उलझनें आखिरी बार के लिए कभी नहीं सुलझतीं। 

उलझनें निश्चित हैं। तुम इसका विश्वास करो। यही उलझनें जीवन का रोमांच हैं। यहां हम सभी सपनों भरे रास्तों के राही हैं। पर सपनों से लड़ा नहीं जाता कि मंजिल क्यों नहीं आ रही है। सपने वो सत्य हैं, जिसे सत्य ने कभी स्वीकार ही नहीं किया। कितना सरल है इस बात को स्वीकार करना कि उलझनें निश्चित हैं। स्वीकार करो, उलझनें स्वयं ही सुंदर हो जाएंगी। किसी फिल्मी नायिका को देखो, बालों उलझी लटों को सुलझाते हुए अप्रतिम सुंदर होती है। मानों दोनों जहान की सुंदरता उसकी उंगलियों में आ बसी हो। 

उलझनें जीवन हैं। उनसे आगे निकल जाने की दौड़ मृत्यु तक पहुंच जाने का सबसे छोटा रास्ता है। मृत्यु यानि रोमांच का अंत। यानि अब जीवन में कुछ भी रोमांचक नहीं रहेगा। सब नीरस, पुराना, गंदला सा हो जायेगा। तुम्हें कहीं जाना नहीं है। तुम्हें जीना है स्वयं को शत प्रतिशत। जीवन एक पार्थिव उपासना है। उलझनें उसके विधि विधान। 

जीवन और उलझनों के बीच से स्वयं को हटा लो। साक्षी भाव का ध्यान करो। तितिक्षा मार्ग है, स्थिति नहीं। तितिक्षा रोमांच की कर्त्ता है। दूर से बैठकर जीवन को देखने के रोमांच को अनुभूत बना लो। इंसान को सबसे ज्यादा रोमांच दूर घटित हो रही घटनाओं को दृश्य के रूप में देखने में आता है। सिनेमा, किताबें, खेल सब इसके मूर्त उदाहरण हैं। जीवन के साथ भी यही है। 

जीवन दूर से देखने की चीज है। जीवन और नियति के रास्ते में अकारण स्वयं को लाना मूर्खता है। जौन का एक शेर है, 

ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को 
अपने अंदाज़ से गँवाने का

इन ग्यारह शब्दों को महसूस करो। ये बताएंगे कि जिंदगी कोई काम नहीं है जिसे किया जाना जरूरी है। जिंदगी वो तोहफा है, जो मिलता एक बार है पर रोमांच हर रोज नया है। इस तोहफे को सीने से लगाओ। पर इतनी दूरी रखो कि बीच में ताजा हवा की जगह बाकी रहे। नहीं तो घुटन से जिंदगी मर जाती है और जिस्म एक लंबी उम्र काटने में तबाह होता है। 

आखिर में एक नोट है, किसी लेखक ने दिया था। जो न जाने कितनी बार मेरे काम आया है, तुम भी पढ़ो !

सब कुछ तो पा ना सकोगे जो चाहते थे, शायद उतना भी नहीं पा सकते थे जितना। तब- जो कभी पाया था, उसमें याद करो सबसे सुन्दर क्या था!

उसको पुकारो, पुनर्जीवित करो, संजो लो मंजूषा में। तुम्हारे भीतर जलती वह नन्ही-सी कंदील तुम्हारी आत्मा का प्रकाश-स्तम्भ है!

किसी और आलम्बन से सुख ना मिलेगा, उसके पास लौट जाओ, उसकी प्रतिमा को सजाओ। याद रखो- सुन्दरता की स्मृति से सुन्दर कुछ नहीं होता, सुन्दरता भी नहीं!

Comments

  1. हम्म.. ख़त भी उतना ही प्यारा है.. शायद जितनी प्यारी बाल सुलझाती हुई लड़की..☺️

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    1. ई बात ऊ मानती ही नहीं है, बड़ा दुख है

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