स्वराग : अनुराग
दुनिया मेरे उसी किरदार को पसंद करती है, जिसमें मैं उसके जैसा दिखता हूं, पर अगर मैं अपने जैसा दिखूं तो न जाने कौन सी कयामत आ जाती है सवाल ही सवाल, नजर ही नजर ; लोगों को लगता है अगर मैं खुदरंग हो गया तो शायद वो या उनका तथाकथित चमकता रंग बदरंग हो जाएगा.
दरअसल कोई फर्क नहीं पडता कि कोई क्या सोचता है, लेकिन एक दिल है जो कभी कभी तटस्थ हो जाता है, मुझे और दुनिया को छोड कर एक स्वायत्त आकार ले लेता है. और सोंचना शुरू कर देता है मेरे बारे में भी, दुनिया के बारे में भी, दरअसल मैं सोंचना भी नहीं चाहता. मैं जानता हूं अगर मैंने किसी भी रंग में घुलने की कोशिश की तो मेरी प्रकृति का रंग ही ऐसा है कि सारा का सारा रंग ही जमाने के लिए बुरा और असह्य बन जाएगा.
इसीलिए मैं माफी नहीं मांग रहा हूं बता रहा हूं मै नहीं बदलने वाला, मेरे लिए तुम खुद को बदलो मैं कभी नहीं कहूंगा, सब अपने अपने रंगो से दुनिया को रंगीन बनाए रखो, रंगों का नाम ही दुनिया है.जिस दिन भी ये दुनिया एक रंग की हो गयी कुछ नहीं बचेगा. इस दुनिया में हर तरफ एक ही बात गूंजेगी मेरा क्या बचा और अपना बचाने की चाहत में हम इस दुनिया को खत्म करने पर आमदा हो जाएंगे.
उसी रोज कयामत आएगी जिस रोज हम सब एक रंग के हो गये।
बहुत खूब मित्र
ReplyDeleteबहुत सही लगे रहो।
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