खुदरंग अनुराग

जब कोई चीज मेरे इतने करीब होती है कि मैं उसे हासिल कर सकूं तो मैं उससे दूरी बनाता हूं. क्योंकि मेरा दर्शन ये कहता है कि अगर दरिया की गहराई पता हो तो उसे पार करने में कौन सी बहादुरी है लेकिन इस दर्शन के अनुकरण के चक्कर में कई बार मैं सबसे प्यारी चीज को खो देता हूं.
मैं नहीं कह रहा कि उससे मुझे कोई दुख होता है क्योंकि अगर हासिल करना ही मेरा अंतिम लक्ष्य होता तो मैं अपने इस दर्शन का अनुकरण कब का छोड चुका था.

लेकिन जिंदगी है, कभी कभी हम कुछ ऐसी चीजें गंवा देते हैं जिनको हासिल कर लेना चाहिए था और तब डगमगाता है मेरा दर्शन शास्त्र, किंतु तब मेरा अनुराग जागता है मुझे नहीं पता दुनिया मेरे नाम का कौन सा अर्थ समझती है या समझना चाहती है फर्क नहीं पडता, मैंने अपने नाम को जो अर्थ अपने अनुभवों के आधार पर बनाया है वो यही  है कि जिस राग का अनुकरण सब करें वो है अनुराग मैं किसी का अनुकरण करता नहीं करवाता हूं.
मुझे फर्क नहीं पडता कौन दुनिया में मेरे बारे में क्या सोंचता है कैसे सोचता क्यों सोचता है बेहद सरल सी बात है.

         अगर गुनाह है खुदरंग होना जमाने से
         गौर से सुनो मैं सबसे बडा गुनहगार हूं
वक्त की स्याही सूख जाएगी मेरा किरदार लिखने में
किसी पन्ने की औकात से हजार गुना बडा किरदार हूं

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