तुम्हारे लिए (भाग 1)
तुम ठहर जाओ जरा सा तो वक्त भी ठहर ही जाएगा, ऐसी ही उम्मीद पाले मैं हर रोज ही लिखता हूं, कुछ प्रणय निवेदन मात्र होते हैं, कुछ में कहानियां होती हैं. मेरी तुम्हरी, उसमें कहीं से दुनिया घुस जाना चाहती है, पर जगह ही नहीं होती हमारा प्यार ही भर चुका होता है उस जगह को, मैं, तुम को मिला के जो हम बने होते हैं.
मैं, हमारे प्रेम को इतिहास के किसी किरदार से नहीं तोलूंगा, कभी भी नहीं, क्योंकि प्यार हमेशा से नित नया और अद्वितीय रहा है. और ये हमारा प्रेम है यहां तो हमेशा ही कुछ नया होगा, यहां किसी पुरानी बात के लिए जगह नहीं है. हमें हर पल को बस प्यार में रह कर जीना है.
तुम्हारी आंखे ही हैं, जो ऐसा जादू कर देती हैं पता नहीं कौन सा, जान नहीं पाया आज तक, अच्छा ही है, एक नयी प्रमेय मिल गयी सुलझाने को, और मैं उम्मीद करता हूं, कभी ना हल कर सकूं, क्योंकि इसी बहाने तुम्हारी मटकती आंखों झांकने का ज्यादा समय पा सकूंगा. (1/3)
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