नारी तुम केवल श्रद्धा हो !
एशिया का पहला नोबेल जीतने पर रॉयटर्स के संवाददाता ने इंग्लैण्ड से फोन कर के गुरुदेव से पूछा, “आपको आपकी कविता के लिए नोबेल मिला है। आप इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं?” गुरुदेव ने जवाब दिया, “मैं कुछ नहीं लिखता। मेरे हृदय के अंदर एक विरहणी निवास करती है। वो रो देती है, और मैं उसका दुःख कागज़ पर उकेर देता हूँ, कविता हो जाती है।”
श्रीमान महिला को आपकी सहानुभूति की जरूरत नहीं है, सृजन के बीज का अंकुरण महिला के गर्भ से ही होता है, महिला खुद में एक सुगंध है जो पूरे चमन को अपनी खुशबू से गुलजार करने का माद्दा रखती है.
मां, बहन, बेटी, प्रेमिका, पत्नी का किरदार एक महिला से हजारों सालों से चिपका हुआ है, आज जरूरत है उस महिला को उसके हजारों सालों से चिपके किरदार से निकालकर स्वायत्त छवि देने की.
ऋग्वेद काल से ही,स्त्रियां लोपामुद्रा,घोषा, विश्वाआरा ,अपाला आदि ने मंत्रो की रचना कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है, आज भी मैत्रायणी द्वारा रचित मैत्रायणी सहिंता व गार्गी द्वारा गार्गी सहिंता भी अमूल्य धरोहर है, रामायण व महाभारत में भी स्त्रियो के सम्मान की महत्ता का वर्णन है.
महिला के भीतर सुख दु:ख मिलकर आनंद का उत्सव मनाते हैं, उसकी महानता, कोमलता, सहजता सृजनता अनिर्वचनीय है, महिला महान शालीनता सिखाती है, हो गुलाब के फूल की पंखुड़ी की भांति है, उसे दूर से देखो, छूने से उसकी खूबसूरती बिखर जाएगी.
घूंघट में रहने वाली महिला आज घूंघट हटाकर एस्ट्रोनॉट और पायलट की हेलमेट पहन रही है, हाथों में सब्जी काटने की चाकू छोड़, मार्शल आर्ट्स और सेना की बंदूकें उठा रही है.
महिला भी अनंत नभ की उन्मुक्त यात्री है, उसे उसका आसमान दो, उसकी जमीन दो, वह तुम्हें बेहतर से और बेहतरीन भविष्य देगी, याद रखो तुम उसी के गर्भ से आए हो, तुम उससे बड़े नहीं हो सकते, तुम्हारा आत्मसम्मान उसके सम्मान से बड़ा नहीं हो सकता.
आज सब की कलम उसके सम्मान में जागृत हो गई है, किंतु जरूरी है कि, हमेशा के लिए हम अपने हृदय में यह आज वाला सम्मान संरक्षित कर लें और जब भी कोई गलत कदम उठाने वाले हों, तो एक बार याद कर लें कि एक पल के लिए भी हमारे दिल में सम्मान था.
Another one.......
ReplyDeleteAmazing creation😊😊