बेइंतहा मोहब्बत

मोहब्बत करना गुनाह नहीं है, करो, बेइंतहा करो, मैं तो यह कहता हूं इतना करो जितना कभी किसी ने ना किया हो.

ना भूतो ना भविष्यति, हर मानदंड, प्रतिमान को तोड़ दो, कोई बंधन ना हो, इतना प्रेम करो, प्रेम करो, सिर्फ प्रेम करो बदले में प्रेम के अपेक्षा गलत नहीं है, कदापि गलत नहीं है.

पर उसके बदले में मिलने वाले प्रेम के आधार पर तुम जब यह तय करने लगते हो कि, तुम उससे कितना प्रेम करोगे, दरअसल तब तुम सबसे बड़ा पाप कर रहे हो.

यहां आदर्शवाद की कोई जरूरत नहीं है, यह कोई रसायन विज्ञान की अभिक्रिया नहीं है, जिसमें प्रतिवर्ती अभिक्रिया हो, तुम अपने प्रेम को सर्वश्रेष्ठ ढंग से करो, अपने पक्षों को सर्वदा ही मजबूत रखो.

प्रेम को जियो, जी भर जियो, बिना प्रभावित हुए कि जिस पर तुम्हारी अभिलाषा जाकर रुकी है, वह कितना अभिलाषीत है तुममें.

अन्यथा प्रेम तुम्हारा विषय नहीं हो सकता, तुम कदापि एक प्रेमी नहीं हो सकते, तुम कुछ भी हो सकते हो पर प्रेमी नहीं, प्रेम तो बस लुटाने की चीज है, इस पूरी दुनिया को प्रेम लुटा सको इससे बड़ी बात और क्या हो सकती..........

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