मैं : कलमकार

मैं कलमकार हूं
मुझे अपने दुख लिखने का
कोई हक नहीं है
मैं खुश भी हूं
तो कलम से...
बयां नहीं कर सकता
मैं आईना हूं...
मेरा अपना किरदार नहीं है
मैं वही लिखूंगा
जो दिखेगा
या जो दिखाया जाएगा...
मेरे गीत ग़ज़ल सब
तुम्हारी कहीं बातें
और तुम्हारे दिए
जख्मो के गुलदस्ते हैं...
जिन्हें बस मैं
करीने से सजा सकता हूं...
मुझे एक भी फूल
उस गुलदस्ते में
लगाने का कोई हक नहीं है...
मैं कलमकार हूं
मुझे अपने दुख लिखने का
कोई हक नहीं है........

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