प्रेम का अर्थ : अप्रायोगिक

अगर किसी रिश्ते में हासिल के नाम पे तुम्हारे पास सिर्फ आंसू है तो क्या कोई अहमियत बचती है इस रिश्ते की

क्या अगर हर रात में तुम्हारा फोन इस फ्रस्ट्रेशन के साथ बन्द होता है कि तुम्हारे सारे मेसेज अनसीन हैं और वो उसके बाद भी ऑनलाइन ऑफलाइन हो रहा है तो क्या रहा वो रिश्ता

वैसे तो रिश्तों के तोलने की कोई तराजू नहीं होती पर अगर उसमें फिक्र नहीं है तो क्या रहा वो रिश्ता

तुम्हें फिक्र है जिसकी खुद से भी ज्यादा उसमें और उसकी बातों में अगर बेफिक्री है तो वो रिश्ता फिल्मी कहानी होने से ज्यादा कुछ नहीं है और फिल्मी कहानी 3 घंटे के the end के साथ खत्म होती है

मुश्किल ये नहीं होता कि किसी के लिए खत लिखा जाए मुश्किल तो ये होता है कि जब लिखे लिखाए खत को भेजने के लिए कोई पता ही ना हो अनाम खत यानी रिश्ते का मजाक होना

किसी भी रिश्ते में ज्यादा सवालों की जगह होनी नहीं चाहिए लेकिन अगर तुम्हारे रिश्ते में सवाल जवाब ही रह जाएं तो रिश्ता बनाने से बेहतर होगा कहीं किसी परीक्षा का प्रश्न पत्र बनाओ

और आखिर में हर रिश्ता अपने आप में खास होता है और जो कुछ भी लिखा है ऊपर वो सिर्फ थिअरी क्लास के नोट्स हैं और जमाना विज्ञान का है इसलिए प्रायोगिक कक्षाओं पर यकीन करो

धन्यवाद्

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