इश्क की बातें - इश्क ही जाने
इश्क यानी कि दुनिया की सबसे खूबसूरत घटना, और जिसके साथ घटित हो जाए उससे और उसके चाहने वाले से खूबसरत कुछ भी नहीं.
फिर भी एक सवाल जो हर किसी के जहन में बाकी सा रहता है वो ये कि, कब मान लिया जाए कि इश्क हो गया ?
दरअसल जब पेड़ की एक डाली पर बैठे बुलबुल के जोड़ों को झगड़ते देख उस लड़के या लड़की के साथ के अपने मस्ती वाले पल याद आ जाएं तो समझना इश्क है...
जब अनुराधा और उदित नारायण की आवाज़ में मंच पर अभिनय करते दो अभिनेता और अभिनेत्री को आमिर और मनीषा के जैसे हम - तुम में बदलते देखो तो समझना कि इश्क है...
हजार बातों को लेकर गुस्सा हो, नाराजगी हो, बात ना करने का मन हो लेकिन बस एक बार जब वो आंखों में आंखें डालकर प्लीज़ या सॉरी बोल दे और सब कुछ भूल पहले सी बात और मस्ती जाग उठे तो समझना इश्क है...
जब सौ लोगों की 16×20 की ग्रुप फोटो में भी बिना ढूंढ़े उसका ही चेहरा सामने आ जाए तो समझना इश्क है...
जब उसको देखे बग़ैर धड़कने तूफान, दिल परेशान, नजर हैरान, जिस्म बेजान रहने लगे तो समझना इश्क है...
बातों - बातों में तुम उसके सामने हर वो बात कह जाओ जो तुम अबतक दिल के संदूक में दबा के बैठे थे, और ना जाने कब तक दबा के बैठे रहते, लेकिन उससे मिलते ही वो अनकही सारी बातें एक सांस में कह जाओ तो समझना इश्क है...
जब मोबाइल में पचास कॉन्टैक्ट होने के बावजूद भी उसी एक के चैट बॉक्स को खोलना, पढ़ना और उसके ना होने पर उन्ही बातों के जरिए उसको जीने की कोशिश करना, तो समझना इश्क है...
इश्क पर लिखना और इश्क को बता देना इतना आसान नहीं...
जो बन पड़ा वो लिखा जो कुछ नहीं लिखा वह भी इश्क ही है, इश्क की मजबूरियां है जो लिखने नहीं देती(दरअसल इश्क ही है जो सारी मजबूरियों से दूर करता है पर....)
इसलिए कुछ बातें बिना बताए समझ लेनी आवश्यक हैं और ऐसी ही कुछ बातें इस 'बकैती' के अलावा हैं जो बातों बातों में इशारों में ही समझ लेनी हैं...
(आज के लिए इतना ही मिलते हैं फिर कभी....)
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