ए मेरे दोस्त...

दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त 

दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से

ये होते हैं वो जिनके मिलने से पहले कि जिंदगी जैसे भी हो पर मिलने के बाद हमारी जिंदगी का ये अहम हिस्सा हो जाते हैं

मेरे दोस्तों में प्रतिमान के तौर पर ना तो जय वीरु की जोड़ी शामिल है, क्योंकि जिंदगी में कोई ठाकुर और कोई बसंती नहीं है

और ना ही सुधा और चंदर के जैसी... क्योंकि हम ना ज्यादा पढ़ाकू हैं और ना किसी डॉक्टर के घर के किराएदार

लेकिन फिर भी गुनाहों के देवता बने ही रहते हैं

और हां यहां जॉन का यह शेर आता जरूर है लेकिन कुछ बातें होती हैं जिन्हें सुनो पढ़ो देखो और भूल जाओ यह सिर्फ मेरे लिए इतना ही है क्योंकि दोस्त दोस्त होता है

हम को यारों ने याद भी न रखा
'जौन' यारों के यार थे हम तो

खैर मेरे दोस्तों की दोस्ती का पैमाना यही है, कि अगर मैं उनके आंखें मिलाऊं और आईने से आंखें मिलाऊं दोनों ही दशाओं में आंखें एक जैसी एक बात ही बोले...

मेरे लिए दोस्ती कभी दिखावा नहीं रही, दोस्ती मेरे लिए वही है कि जब कोई सहारा ना बचे तो चुपचाप जाकर नींव की ईंट की बन जाना...

जो एक दिन जमीन में दब जाएगी, जमाने को नहीं दिखेगी... पर जब उस इमारत के जीवन काल में कोई परेशानी होगी तो पहले हम दर्द सहेंगे और इस इमारत को महफूज रखेंगे

मित्रता में एक शीतलता है, दोस्ती अधिक स्पष्ट है, आप किसी के अस्तित्व में बस आनन्दित होते हैं, आप किसी के होने का जश्न मनाते हैं, बिना किसी कारण के यह बहुत तर्कहीन है। प्यार का एक तर्कसंगत गुण है लेकिन दोस्ती बहुत ही तर्कहीन है...

और जिंदगी में जो कुछ तर्कों से साबित किया जा सकता है वह हर कोई जीता है और करता है लेकिन बिना बोले बिना तर्कों के बस कह दिया जाए वही होती दोस्ती...

एक और बात जो इसमें जुड़ सकती है... वो ये कि दोस्ती के साथ आता है प्रेम...

मेरा मानना है प्रेम एक लहर है उसको आना है, चले जाना है, फिर आना है.. लेकिन दोस्ती सास्वत है, वो वक्त के हिसाब से नहीं बदलती, वह वक्त को अपने हिसाब से बदल लेती है

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