पाती पिताजी के नाम

पिताजी लगभग 10 साल हो गए लिखते हुए, क्या लिखा आज कुछ याद नहीं और मुझे होता भी नहीं - जैसे आपने बचपन से ही मुझे ग्रामर की टेंस याद करवाने के कितने जतन किए, हर बार बस में, ट्रेन में जो भी किताब मिलती वो लेके आ जाते, और नालायक हम आज तक नहीं याद कर सके.

बात शुरू की थी लिखने से - प्रेमियों के लिए गीत लिखे, प्रेमिका के नाम खत लिखे, समाज पर संजीदगी लिखी, राजनीति पर व्यंग लिखे, दोस्तों के लिए चुटकुले लिखे, आपके ऊपर नहीं लिख पाया कुछ - हकीकत बता रहा हूं हर बार जब लिखता हूं तो 50 शब्द लिखने के बाद एक साथ बैकस्पेस दबाता हूं और सारे शब्द मिटा देता हूं, क्योंकि हर बार लगता है कुछ अधूरा है कुछ छूट गया है क्योंकि आपको किसी लेख में, किसी लिखने में समेट पाना मुझ से अदने लेखक जिसको लेखक होने का मतलब भी नहीं पता और चाहे बड़े से बड़ा लेखक हो किसी के लिए संभव नहीं है.

हम दुनिया में कोई भी मुकाम पा ले कहीं भी चले जाएं कुछ भी हासिल करना लेकिन अगर आप से दूर चले गए तो हासिल करके उस हासिल का भी कोई हासिल नहीं होने वाला, बस मशीन सी ऐसे जिंदगी रह जाएगी.

इतनी सारी बड़ी-बड़ी बातें यहां कर रहा हूं आपके सामने आखिरी बार इतनी बातें कब बोली थी मुझे नहीं पता क्योंकि आपका तो हैं ना की एक बात बोलो उसके हजार मतलब निकलते हैं 10000 ढंग से समझाते हैं और फिर जाकर के 1 उपाय निकलता है, एक बात निकलती है .

हम सब उस घर से आते हैं जिस घर ने उत्थान पतन - उत्थान पतन ऐसे देखा है जैसे रामचरितमानस के अलग-अलग खण्डों को पढ़ते हुए एक पाठक देखता है, बचपना अलग, प्रौढ़ावस्था अलग, जवानी अलग, मैच्योरिटी अलग,जमाने की सारी उठापटक और ऊहापोह को देखा है आपने सब कुछ सीखा - सिखाया है आपने.

पापा हम सब छोटे से गांव के रहने वाले हैं जहां ना कुछ खास है और ना कुछ खास होने की उम्मीद है, लेकिन वहीं रह करके, वही जिंदगी गुजार करके, सारा बचपना गुजार करके - जिसे कहते हैं कि जहां इंसान बनता बिगड़ता है आपने ऐसा बनाया कि आज दुनिया के किसी भी कोने में जाकर के मैं खड़ा हो जाऊं तो क्या मजाल किसी भी इंसान की कि वह एक बार के लिए मुझसे किसी भी विषय पर, तथ्य पर भिड़ने की हिम्मत रखे.

याद है आपकी वह कहानी वह बात जो आपने बताई थी यूनिवर्सिटी में "राजा मुकुट का प्रतीक है या मुकुट राजा का" इस बात को लेकर प्रोफेसर से हुई, बहस के बाद आपको जब उसने अपने केबिन में बुलाया और पूछा कि आपके पिताजी क्या करते हैं और आपने बताया की ड्राइवर हैं और फिर उसका रिएक्शन और आज तक जब जब वह मिलते हैं तो उनकी आंखों में एक अलग ही भाव होता है आपको देखने का.

शायद हमारे घर से ज्यादा मुश्किलें, परेशानियां, कठिनाइयां किसी किसी घर को देखनी पड़ती होंगी, आज भी हर मुश्किल को इतनी आसानी से आसान बना देते हैं की थोड़ी देर बाद लगता ही नहीं कहीं कोई मुश्किल है दुनिया इतनी आसान बना दिया आपने लगता है दुनिया मेरे लिए ही बनी है, मेरी ही है दुनिया.

हम लोग बहुत ज्यादा कमाने वाले लोग नहीं है, यह बात हमारे आपके सिवा कोई नहीं जानता ना, फिर भी मुझे नहीं याद पड़ता कि आखरी बार मेरे खाते में 5 अंक से पैसे कब कम हुए थे, एक साधारण छात्र के लिए बर्बाद होने की निशानी हैं इतने पैसे
लेकिन आपने पता नहीं क्या भर दिया है अंदर में कि कभी पासबुक देखकर के खर्च करने की आदत ही नहीं अाई, और ना ही इस बात का दंभ आया की मेरी जेब में पड़े पैसे कितने हैं.

मुझे जो पहली किताब आपने दी थी साहित्य की वो थी देवदास, दूसरी मधुशाला, तीसरी गुनाहों का देवता... आज कोई भी पिता यह सोच भी नहीं सकता कि जिन किताबों को उसने घरवालों से छुपा के पढ़ी होंगी उन्हें वह अपने बच्चे को उपहार देगा, पिता जी आपने एक ही बात कही थी किसी चीज को पूर्वाग्रह से मत देखो हर चीज को नई नजर और नए नजरिए से देखो पहले से बेहतर नजर आएगी.

मधुशाला की वह लाइन जो आपको सबसे ज्यादा पसंद है - बड़े बड़े परिवार में यों
     एक न हो रोने वाला
     हो जाएं सुनसान महल वो
     जहां थिरकती सुरबाला

एक मजेदार बात पता है आपको हमारी आपकी आज तक की एक फ्रेम में फोटो नहीं है, मैं नहीं जानता क्यों, शायद आप भी नहीं जानते हैं और हमने इस बात को कभी सोचा भी नहीं होगा, कि क्यों एक फ्रेम में हम दोनों नहीं आए, जबकि हमने तो इतनी समानता है की शक्ल से लेकर के अकल तक, सारा कुछ एक दूजे का एक जैसा ही है

याद है कक्षा 9 में स्कूल जाने के लिए मैं तैयार हो रहा था बस के आने का टाइम था आप घर आए हुए थे पता नहीं क्या आपके दिमाग में आया, मुझे बुलाया और चुपचाप कहा सुनो ' पीट के आना पिट के नहीं ' , कितने साल बीत गए लेकिन आपके इस वादे को कभी नहीं तोड़ा, ये एटीट्यूड आपने ही दिया है कुछ भी हो जाए इसे कभी नहीं बदलेंगे.

मुझ में भी वही वाली, अपनी वाली बुरी आदत डाल दी है, यह वाली बताएंगे नहीं किसी को बस आप समझ लें हम समझ लें क्योंकि यह वाली बात हर किसी को समझाने के लिए नहीं है, जो मुझे समझ लेगा वह आपको समझ लेगा जो आपको समझ लेगा वह मुझे समझ लेगा हम दोनों एक दूसरे के प्रश्न और समीकरण हैं.

एक हेल्प चाहिए आपसे आपके तो पांच छह दोस्त हैं भी पापा, मुझ में ऐसी क्या कमी रखी है कि आप के सिवा कोई दोस्त नहीं बना अभी कमी है या कुछ और इसे बता देना क्योंकि मुश्किल बहुत करती है ये.

आज भी आपका फोन आता है बातें कम होती हों मैं भी बेवजह पता नहीं किन विषयों में उलझा हूं, आप भी जिम्मेदारियों और उम्र के बोझ के तले झुके नहीं है, उन से लड़ रहे हैं और हम दोनों की मजबूरियों ने हम दोनों के बीच थोड़ी दूरियां बढ़ा दी हैं, लेकिन यह दूरियां कुछ नहीं हैं, आज भी जिंदगी के किसी भी मोड़ पर जब मुझे कुछ नहीं दिखता - जहां लोग बाहर उदाहरण ढूंढते हैं वहां मेरे लिए आप खड़े हो जाते हैं, मैं दुनिया में दूसरा उदाहरण नहीं ला सकता जो आप की भरपाई कर सके.

एक शेर पता नहीं कब किस दिमाग से लिखा था...

तमाम एहतमाम मेरे ऐश के करके
एहतियात देता है आइय्याश ना होना

(जब इसको लिखना शुरू किया था तो पता नहीं कितनी बातें थी कितनी यादें थी, साकेत महाविद्यालय, रेडियो की दुकान , कानपुर ट्रांसपोर्ट नगर, दिल्ली डीटीसी, और न जाने क्या क्या.
साथ ही आपकी पिटाई आपका दुलार - 'जो एक आम पिता की तरह आप कभी जाहिर नहीं करते'

आपके बचपन की कहानियां जो परदादी से सुनी थी, कुछ आप की कहानियां जो आप की जुबानी सुनी थीं.

सच बताऊं पता नहीं कितना लिखना था लेकिन जब लिखने बैठो तो कुछ याद नहीं रहता और बस वही लिखता चला जाता है जो कभी कह नहीं पाते बहुत सी अनकही बातें हैं जो आपसे कह रही है देखते हैं इतनी हिम्मत कब आती है सारा कुछ आपसे कह पायें )

हमारे रिश्ते में शुक्रिया और माफ़ी के लिए कोई जगह नहीं है, जो गलत है वह गलत है जो सही है वह सही है यही बात आपने सिखाइ है.

और हां आपने एक और चीज कह रखी है, अरे वही वाली, महिला मित्र वाली, हां हां बता देंगे आपको जैसे सेट हुई क्योंकि अपने अपनी वाली बताई थी वो मास्टर की वाली...

पिताजी अब मैं कलम रोक रहा हूं, कहानी नहीं रुक रही है क्योंकि आप वह चीज हैं जहां एक बार के लिए मैं भगवान कोई किताब में समेट लूंगा, आप को नहीं समेट पाऊंगा हर पल नए हर पल कुछ अलग आप नजर आते हैं.

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