तुम्हारे राम के खिलाफ
मेरा नाम अनुराग मिश्रा और मैं अयोध्या से हूं,
जहां तक लोग मुझे जानते हैं साथ में ये जरूर जानते हैं कि मैं अयोध्या से हूं,
तो सफाई कर्मचारी से लेकर सरकारी कर्मचारी तक, हर किसी का पहला सवाल होता है अब तो अयोध्या में मजे आ गए होंगे... आगे की बात बोलें इससे पहले एक घोषणा, कि राम आपके जितने आराध्य हैं उससे कम मेरे नहीं है, और अगर भावुकता में बात हो तो आपसे ज्यादा ही होंगे.
अब आते हैं मुद्दे पर मेरा वाइवा था हाल में ही में और सामने जो प्रबुद्ध व्यक्ति तो बैठे थे तीन चार प्रश्नों के बाद सीधा प्रश्न किया "अरे अब तो योद्धा में मजे आ गए होंगे एकदम माहौल टाइट होगा", मैं चौका तपाक से बिना यह सोचे कि नंबर कटेगा या मिलेगा जवाब दिया "सर! थोड़े भिखारी बढ़ जाएंगे और बकाया जैसा है वैसा ही चलता रहेगा, क्योंकि राम को चाहने वाले तब भी आते थे, अब भी आ रहे हैं और आगे भी आएंगे, वो मंदिर के ढांचे के मोहताज नहीं थे... और इसका यह मतलब नहीं कि मैं काफिराना बुतपरस्ती वाली बात की वकालत कर रहा हूं
बात इतनी सी है की अयोध्या वालों के लिए राम खेवइया, राम ही मालिक थे, हैं और रहेंगे, पर बंधु क्या आपने अपने आपको राम बनाने की कोशिश की, अपने संकीर्ण मानसिकता के कोटर से बाहर निकले, हर मुद्दे में कोई ना कोई पंथ ढूंढने की आदत छोड़ी, खुद को कभी खुलकर सोचने का मौका दिया, या केवल व्हाट्सएप फॉरवर्ड से प्रभु की कृपा ही ले लिए जा रहे हैं.
अच्छा अगर एक सवाल में पूछूं कि राम मंदिर बनाकर क्या मिलेगा और जो इसका जवाब है आपका वो मै भी जनता हूं पर सवाल अब शुरू होता है, क्या राम उच्चारण से आचरण तक आए, राम जी की कृपा से मंदिर बन गया और मजा आ गया आपने कुछ ऐसा किया जिससे मजा आ जाए कभी अन्याय के खिलाफ कभी शोषण के खिलाफ बोला, लिखा.
भैया राम-राम ही रहेंगे राम जब टाट में थे, तब भी सारे पट्ठे ठाट में थे और राम मंदिर में आ जाएंगे तब भी पट्ठे ठाट में रहेंगे, आप कहां रहोगे, बहुत काम करने का शौक है कोई इतिहास की किताब उठा लेना और किसी पन्ने पर जो भी लिखा मिले कि रामायण एक काव्यात्मक ग्रंथ है या अगर बहुत जज्बा है तो सुप्रीम कोर्ट का हजार पन्ने का फैसला पढ़कर उसमें यह तलाशना कि सुप्रीम कोर्ट ने राम के जन्म भूमि पर क्या कहा है, रवीश कुमार ना बनो दिल की अदालत में कोर्ट की अदालत के फैसले को मत लपेटो.
शौक है काम करने का तो यूपीएससी के आंसर में यह लिखवा कर दिखाओ की राम-राम थे और रामायण काव्यात्मक ग्रंथ नहीं राम की जीवनी है जो राम आपके भीतर जीते हैं जो राम हम सभी के भीतर जीते हैं मंदिर तो जिनको बनवाना था उन्होंने अपनी अंगीठी जला ली है, ठंड आने वाली है अच्छे से हाथ सेकेंगे, अपना भी इंतजाम देख लो नहीं तो, ठंड सबकुछ ठंडा कर देगी.
राम एक सुखद आश्चर्य जो अनिर्वचानिय है, राम वो सत्य हैं जिसका प्रमाण स्वयं वही हैं, आप भी बनिए अपना साक्ष्य स्वयं ताकि कभी समय की गवाही में ये ना तलाशना पड़े कि मंदिर बनते या मस्जिद टूटते समय आप कहां थे और आप इस डर से दुबक जाएं कि अरे हम तो टीवी का चैनल घुमा कर राम को खबर बना रहे थे.
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