मोहब्ब्त है
तुम्हारी टकटकी में टंका एक एहसास
सांसों की गर्मी, हाथों की नरमी
तुम्हारी जुल्फों की कारगुजारी
कांधे का मासूम तिल, उस पर से गुजरती मेरी खुरदरी उंगलियां
दिसंबर की बारिश, जनवरी की धुंध, फरवरी का गुनगुनापन
तुम्हारा अल्हड़ यौवनी बचपन, होठों से बनी कहानियां दिल के अधूरे किस्से
जैसा तमाम कुछ है यादों की छांव में बैठकर लिखने को, पर इन सब को ताक पर रख, अगर बेताब हूं किसी इल्तेजा में तो यही की तुम लौट आने का वादा करो और कहो मोहब्ब्त है
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