खुला खत सबके नाम नए साल के बहाने

किसी भी जाते हुए को अलविदा कह पाना जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी होती है और जब वो ऐसा हो जिसके साथ हर एक लम्हां गुजारा हो, 

हाँ साल जो फ़िलहाल बीतने को है और बीतने से इसको रोकने की कोई भी कोशिश शायद किसी भी दस्तूरे हाल में मुमकिन न हो, सबसे मुश्किल होता है की जिसके साथ ३६५ दिन गुजारे सिर्फ एक पल में अलविदा कह देना, और उससे भी दुःखद की क्षण मात्र का पश्चाताप या रुदन भी ना कर सकना की सहसा दूसरा आकर खड़ा हो.

साल बा साल यादों का गुल्लक भरता ही जाता है, कुछ खट्टी मीठी यादें समेटे गुजर ही जाता है, नया साल ऐसे ही होता है जैसे अंधकार के गरजते समुद्र में उतरना, लहरों से लड़ना बिना पतवारों के, एक अजीब से सुख को जीना जिसमे से तमाम दुखों की बू आ रही हो, 

खैर फिर भी ठहरा इंसान ही, वियोग से या विवशता से, वो इसका निर्णय नहीं कर पाता पर पर उतर ही जाना होता है उस अगाध समुद्र में.

कुछ यादें जिनमे हम खुद को शायद कभी माफ़ न कर सकें, कुछ बातें जिनके लिए हम शायद खुद को मना न सकें, शायद ऐसी जान के मालिक बन जाएँ की उसको कहीं लगा ही न सकें, मंजिलो की चोटियों पर पहुंच कर शायद हम सोच भी न सकें की ये उरूज है या जवाल है, शायद, शायद और शायद की उलझनों  बहार न निकल सकें, 

पर जरुरी है जब हमने नया साल माना है तो कुछ नया जैसा लाएं तमाम कुंठाओं, निराशाओ, प्रतिशोधों, विकृतियों से बहार निकल उगते सूरज को सलामी दें.
मगर पुराने को भूलने की जल्दी में उन्हें या वो ना भूल बैठें जिनके होने ने हर पल आपको अनोखे नए पन का एहसास कराया है, कई कई बार आपके लिए वक़्त को थामने की नाकाम कोशिशें की हैं, 

आखिर में मेरे खुद के लिए - शुक्रिया सब का जो साल भर साथ रहे, दुगना शुक्रिया उनका भी जो न रहे, दोनों की उमरों की किन्हीं रिक्तियों को अगर भरने में किंचित भी कामयाब रहा तो तुम सब मेरी चिरसिंचित अभिलाषा को पूरा करते रहना कि, जैसा भी हूँ ढोते रहना, अगर प्राण उड़ भी जाएँ तो मुझ बेताल को विक्रम बन अपनी पीठ पे ढोते रहना, मैं भी झूठी सच्ची कहानियां सुना तुम्हारा दिल बहलाने की कोशिश करूंगा.


रिजवी साहब का एक शेर जो किसी वजह के चलते जाने कितनी उमरों के लिए दिल के रसातल में बैठ गया है, आखिर में वही शेर नज्र करूंगा, कि
आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर
 रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा

साल मुबारक, तमाम मोहब्बतों के साथ
Anuragvaani 
     (हाथ जोड़ना अच्छे से नहीं आता फिर भी दिल से)

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