इतनी सी बात है
तुम्हारा मेरे साथ होना ऐसा ही जैसा सरयू का अयोध्या के साथ होना, जैसे राम में सीता का होना, जैसे गीत में संगीत का होना, कैसे ऋषि की साधना में वांछित प्राप्य का होना, जैसे शिशु का अपनी माता के साथ होना, जैसे कोयल की आवाज में मिठास का होना, जैसे किसी लेखक के पास लिखने की वजह होना, यानी समय के बदलने से लेकर परिस्थितयों के ताल मेल से ऊपर होकर होना
जैसे आकाश के पास चंद्रमा है, चंद्रमा के पास ज्योति है, ज्योति का मूल सूर्य है और सूर्य का मूल मुझे व्यक्तिगत रूप से अज्ञात, जैसे शिव के पास शक्ति हैं, शक्ति के पास शिव हैं और इन दोनों का सम्मेलन अद्वितीय है, जैसे धमनियों में रक्त का होना, रक्त में हीमोग्लोबिन का होना सब एक दूजे के पूरक, जैसे घंटियों में सुरमई नाद का होना जिसके ध्वनि वातावरण को गुंजित करती हो, और तुम्हारी मेरे हृदय को
इसके बाद भी वही सवाल जहन में आके थम जाता है कि क्या है हमारा तुम्हारा होना, जैसे प्रश्न हो एक लेखक से कि कविता लिखने का क्या काम इससे किसी का पेट तो भरता नहीं, तब मेरे पास शब्द व्यूह समाप्त हो चलता है, भावनाएं गले में आके रूंध जाती हैं जैसे कहती हों, क्या कहोगे
तब नए जमाने के जगजीत सिंह याद आते हैं यानी अरिजीत सिंह, वो गाना है ना
"चलो जी आज साफ साफ कहता हूं!
इतनी सी बात है...मुझे तुमसे प्यार है!
यूँ ही नहीं मैं तुमपे जान देता हूँ!
इतनी सी बात है....मुझे तुमसे प्यार है!"
सच! बस इतनी सी ही तो बात है!
बात होने को इतनी सी है, पर सच में ये ब्रह्माण्ड की सबसे अद्वितीय घटना है, ना भूतो न भविष्यति, इसके बाद कुछ नहीं होगा ऐसा जैसा ये है, ये दो शक्तियों का मिलन है, ये वो संयोग है जो नक्षत्रों के टूटने जुड़ने से नहीं बल्कि हमारे तुम्हारे मिलने से बनता है
तुम्हारा मेरे साथ होना यानी श्रृष्टि का सृजेता के साथ होना, प्रेम के साधक का प्रेम और किस्मत की देवी के साथ होना, तुम्हारा मेरे साथ होना यानी समस्त यानी नामक शब्दों का समाप्त हो शून्य की ओर बढ़ना !
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