हजारों ख्वाहिशें ऐसी

जमाने को देखता हूं 
और तुम्हें देखता हूं 
तो बस संभालने को जी चाहता है
जनता हूं वक़िफ नहीं हो
ना मोहब्बत से ना जमाने से
मुस्कुराहटों पे फ़िदा होते हो
अदाओं पे मुस्कुराते हो
जरा सी बात पर अक्सर
बेवजह खिलखिलाते हो

सुनो हम मरती हुई दुनिया के लोग हैं
यहां कोई किसी को बचाने को नहीं बचा है
हर कोई खुद को समेट रहा है
संगीतकार की तरह
जिंदगी के जटिल तानों में उलझे हो
सरगमों को लांघकर अनहद में भटक रहे हो
पर रुको ये दुनिया यही नहीं है
इसके आलवा जहां और भी हैं

कुछ बिसात नहीं मेरी हकीकत में
पर ख्वाब ही सही खुद को खुदा माना है
दिन रात भटक रहा हूं वही खुदा बनने में
मुझे दुनिया का खुदा नहीं बनना
पर हां तुम्हारा बनना है
जिससे तुम जो चाहो वो उम्मीद कर सको
जो चाहो वो मांग सको
जिसकी बेपनाह मोहब्बत की छांव तले
तुम जिंदगी के सफर की मौज ले सको

अब मैं तुमसे मोहब्बत नहीं मांगूंगा
जिस दिन नजर हैरान, दिल परेशान हो
और मुझे तलाशने को जी चाहे
जहां भी रहना... जान
आवाज़ देना, वहीं मिलूंगा, 
जहां से जैसे तुम गए थे कभी

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