लघु प्रेम कथाएं भाग - 1 | Short love stories Part - 1 by Anuragvaani


नहीं भूलेंगे कभी 

अच्छा ये बताओ तुम ये कविताएं किसके लिए लिखते हो
प्रेम के लिए
क्या मतलब किसी की याद मे नहीं
नहीं जानती हो याद की खास बात है उसके साथ भूल जाना भी आता है
तो क्या भूल जाते हो तुम लोगों को
भूलना नहीं चाहता
बताया नहीं तुमने भूल जाते हो क्या
क्यों ये सवाल क्यों
ऐसे ही बेवजह
सुनो! तुमको नहीं भूलेंगे कभी भी.

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अपने अपने राम 

सुरेन्द्र इतनी रात को फोन, तुम जानते हो न मैं घर पे हूँ
तो क्या हुआ घर पे ही तो हो
घर पे हूँ सब लोग हैं
तो मैं भी तो घर पर हूँ, मेरे यहाँ भी सब लोग हैं 
मेरे घर वाले इतनी रात को बात करने की इजाजत नहीं देंगे
मतलब नहीं देंगे ? क्यों
क्योंकि वो तुमको नहीं जानते
अच्छा, बताया नहीं क्या उनको
नहीं क्यूँ बताऊँ और क्या बताऊँ
यही की मेरा नाम सुरेन्द्र है
उससे क्या होगा
सब लोग जान जाएंगे मेरे बारे मे बस
उससे क्या होगा
बता के देख लेना
अच्छा चलो रखो सब लोग बुला रहे हैं
जाओ खा लो और राम जी से भी मिल लेना और उसके बाद वापस आना
हाँ सीता के राम से मिल के अपने राम से भी मिलना है.

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दूसरी दुनिया 

भागों चलो यहाँ से ये दुनिया किसी काम की नहीं
तो कहाँ जाओगे
नहीं पता मगर इससे बहुत दूर
जब पता नहीं तो कौन से दूर
अरे तुम बाहर तो आओ फिर चलेंगे कहीं अपनी दुनिया मे
कौन सी अपनी दुनिया राकेश, कहीं नहीं है कुछ
है राधा तुम आओ तो, मैं ले चलूँगा तुमको
राकेश होश मे आओ दूर दूर तक ये धरती ये आसमान ये लोग नहीं खतम होते नजर आते
तुमको मुझसे मतलब है या इन सारी चीजों से
तुमसे मतलब है मगर हम भी तो अलग नहीं न इनसे
क्यों अलग नहीं क्या ये भी इतना ही प्रेम करते हैं तुमसे, क्या ये भी तुम्हारे सारे गैर जरूरी कामों को जहां के सबसे जरूरी काम जैसे करते हैं
अरे तो बस प्रेम ही तो..
बस प्रेम? राधा प्रेम को कौन सी तराजू पे तोल रही हो, तुम्हारे लिए मेरा प्रेम, बस प्रेम है ?
नहीं राकेश तुम गलत समझ रहे हो, हमारा प्रेम अमर है
अमर क्या होता है, हमारे मरने के बाद की दुनिया का क्या दावा जब हमारे रहते हमारा प्रेम स्वीकार्य नहीं तो मरने के बाद का क्या
राकेश हर बात को इतना क्यूँ बढ़ते हो, छोटी सी तो बात है
छोटी सी, अपने सारे उम्र भर के प्रेम का निचोड़ तुम्हारे आँचल मे रख दिया और ये छोटी सी बात है
तो कौन सा एहसान कर दिया, मैंने भी तो प्रेम किया तुमसे वैसा ही
राधा.. .. .. .. ..

इसके बाद दरअसल दो प्रेमियों के पास कहने को कुछ बचता नहीं सो इनके पास भी नहीं बचा, राधा मुस्कुराई राकेश ने अपने बालों को हाथों को संवारा फिर दोनों ने एक दूसरे की कानी उंगली को एकदूजे की उंगलियों मे फँसाया और गोल मार्केट के चौराहे पर गोलगप्पा खाने चले गए.

instagram - @anuragvaani

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पढ़ लिए होंगे उम्मीद है पसंद भी आई होगी तो बड़े दिनों से मुफ़्त मे पढ़ रहे हो तो पैसा नहीं देना है, बस इसको फॉलो कर लो भौकाल बनाने के काम आता है.

चलिए शुक्रिया प्रणाम नमस्ते मिलते नई दिलफेंक दास्ताँ के साथ  


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