पूरा का पूरा मैं
आखिर क्यों हर बार तुम्हारे
पूर्वाग्रह मुझे गलत मानते हैं, आखिर क्यों मेरा
पूछा गया हर सवाल तुम्हें इस बात का आभास कराता है कि मैं तुमसे जवाब ही चाहता हूं,
आखिर क्यों मैं, मैं नहीं बल्कि
कोई और हो जाता हूं तुम्हारे लिए, वह जिसने
तुम्हारे साथ कुछ गलत किया, क्या कभी मुझसे
मिलने की कोशिश की है,
क्या कभी मैं क्या हूं
जानने की कोशिश की है, क्या कभी मेरे ‘फर्क नहीं पड़ता’ वाले लड़के के
भीतर की वेदना देखी है, कभी देखी है मेरे
दिल ओ दिमाग की बेचैनी,
कभी महसूस किया
है मेरे ऊपर का बोझ, कभी सुकून से बैठे हो
मेरे साथ, जहां तुम मुझ में बस मुझको तलाशो ना कि किसी
और को, वो और जिसने तुम्हारे साथ शायद कुछ गलत किया
जिसने शायद तुम पर तोहमते
लगाई इल्जाम लगाये शायद तुमसे कुछ वादे किये और कभी ना पूरा कर सकने के डर से भाग
गया और वह सारा कुछ तुम्हारे भीतर बैठ गया और तुम कभी किसी से ना कह सके,
तो जब मैं, मैं की तरह शुन्य की जमीन पर तुमसे मिलता
हूं तो तुम मुझ में क्यों किसी और को तलाशने लगते हो, क्यों कभी कोशिश नहीं करते देखने की मेरी बातों की गहराई,
मेरी बाते और मेरी सोच इतनी उथली नहीं, मैं इतना उथला नहीं हूं जितना तमाम दुनिया है, जब मैं तुम्हारी रहस्यमई आंखों में आंखें डाल कर पूरे यकीन
के साथ कहता हूं ‘मैं अलग हूं’ तो यकीन मानो मैं अलग हूं
मेरे वादों को देखना मैं
कभी वो वादे नहीं देता जो पूरे ना हो सके, मैं अगले पल की
बात नहीं करता मैं उंगली से आसमान के तारे तोड़ने की बातें नहीं कर रहा होता,
मैं ख्वाब दिखाता हूं पर हकीकत की जमीन पर खड़े होकर, मैं भी चांद पर घर बनाने की बात कहता हूं मगर उसकी जो जमीन
होती है वह मेरी होती है
यकिन मानो मैं वो नहीं हूँ, जिसको तुमने आज तक
मुझमे देखा है,मुझ मे कभी मुझ को देखना, जिस दिन देख लेना
उस दिन जवाब देना मेरे किसी भी सवाल का तब तक के लिये माफी अगर गलत कहा तो

Adbhut....👌👌👌👌
ReplyDeleteShukriya bhai
Delete#सच मुच कमाल है।
ReplyDeleteShukriya 🙏😊
Deleteहूं नहीं वैसा जो मैं दुनिया को दिखता हूं
ReplyDeleteहम जाल डालते नहीं, मछली खुद आए तो का करें 🙏😉
DeleteBahut accha bhai 😍
ReplyDeleteshukriya bhai
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