कोई प्रेम नहीं बचाएगा

नफ़रत आयेगी एक दिन
सबसे पहला शिकार प्रेम होगा
चोर आएंगे एक दिन
सब मोहब्ब्त का माल लूट ले जाएंगे
बहेलिए आएंगे एक दिन
पहला हमला प्रेम पर होगा
बारिश आएगी एक दिन
सड़ा देगी वो प्रेम को
दीमक लगेंगे एक दिन
चाट जाएंगे प्रेम को
कायदे आयेंगे एक दिन
सब प्रेम पर लागू होंगे

कोई प्रेम नहीं बचाएगा
पंडित अपनी पोथी बचाएगा
साधु अपनी माला
शराबी मधुशाला
सोना अपनी चमक
चांदी अपनी सफेदी
सूर्य अपनी लालिमा
इन्द्र अपना इंद्रासन
राम अपनी मर्यादा
कृष्ण अपनी माया
धर्म अपनी सत्य
समय अपना चक्र
सत्य अपना प्रमाण
दुनिया अपना अस्तित्व

तुम भी बचाओगी
तुम बचओगी... ?
क्या बचाओगी
प्रेम तो कतई नहीं
है ना
तुम बचाओगी अपना अहम्

कोई प्रेम नहीं बचाएगा

वैसे मेरे पास करने को कुछ नहीं होगा
सो मैं बचाऊंगा प्रेम

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